Saturday, June 3, 2017

दिल्ली की दुविधा

दिल्ली की दुविधा 😡👈👈👈✍️✍️
दिल्ली में चुनाव के समय आम आदमी पार्टी नई थी और पूर्ण रूप से आश्वस्त होकर कह सकता हूँ कि आप के जितना कर्मठ कोई और था भी नही अतः दिल्ली की जनता ने अपना पूर्ण मतदान आम आदमी पार्टी और श्री अरविन्द केजरीवाल को दिया तथा दिल्ली में बहुमत की सरकार बनवाई |
जब जनता ने पूर्ण बहुमत देकर किसी पार्टी को जितवाया है तो उस पार्टी से उम्मीद की जाती है कि वो पार्टी और उसकी सरकार जनता के हित के लिए काम करें |

दिल्ली की जनता के विश्वास पर खरा उतरने का कार्य जैसे ही अरविन्द केजरीवाल और उनकी सरकार ने शुरू किया तो एक हारा हुआ दल जिसकी देश में सरकार है जिसके पास पूरी ताकत है , संगठन है ,, पैसा है सब कुछ है, ने अपनी गंदी राजनीति शुरू कर दी चूँकि पुलिस उनके पास थी तो पहले तो उन्होंने पुलिस के माध्यम से आम आदमी पार्टी के विधायको को गिरफ्तार क्क्रना शुरू किया वो भी मामूली से मामलों पर जिनमे से अधिकांश केवल आरोप तक ही सिमित थे जिनके मामले में आज तलक दिल्ली पुलिस जांच पूरी नही कर पाई है |

पहला एजेंडा था कि भ्रष्टाचार को खत्म कैसे किया जाये , उसके लिए एंटी करप्शन ब्यूरो की आवश्यकता थी जिसके लिए मुख्यमंत्री द्वारा SS यादव आईपीएस को नियुक्त किया गया था, 150 से ज्यादा गिरफ्तारी और एक हेल्पलाइन फोन नंबर जारी किया गया लेकिन एक रोज जब इसी ब्यूरो ने दिल्ली पुलिस के 2 सिपाहियों को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया तो खलबली मच गयी क्यूंकि अगर ऐसे ही गिरफ्तारी का सिलसिला चल पड़ता तो इसकी काफी अनसुनी परतें सामने आ जाती | इसके बाद एक अतिरिक्त पद को स्थापित किया गया तथा MK मीना आईपीएस को वहां नियुक्त कर दिया गया उसके पश्चात सरकार के अधिकार से ACB का कार्य एक तरह से छीन लिया गया |


उसके बाद एक ऐसे आदमी के माध्यम से दिल्ली की सरकार को परेशान किया जाने लगा जिसका मतदान और सरकार से कोई जमीनी रिश्ता नही होता हालाँकि संविधान के अनुसार रिश्ता जरुर है , दिल्ली के राज्यपाल के माध्यम से दिल्ली की चुनी हुई सरकार को परेशान किया जाने लगा , चूँकि जनता ने मतदान किया है तो जनता काम मांगती है , जब भी कोई कारवाई या न्य कार्य दिल्ली की चुनी हुई सरकार शुरू करती उसमे टांग अडाने या विघ्न पैदा करने के आदेश उपराज्यपाल को प्रधानमंत्री कार्यालय से दे दिए जाते | सैंकड़ो फाइल्स को LG ने रोक कर रखा , अधिकांश को वापिस लौटा दिया | लेकिन अभी तक ये टांग अडाने का काम इतना प्रबल नही था |
                                       Image result for lg and kejriwal
इस टांग अडाने के मामले को लेकर सरकार ने हाई कोर्ट का रुख किया , वहां के माननीय जज साहब ने फैसला दिया कि LG ही बड़े है और इन्ही कि चलेगी , तो इस बारे में मेरा और सरकार का दोनों का एक ही मत है- दिल्ली के और देश के लोगों के मतदान में फर्क क्यूँ किया जाता है , वही वोटर कार्ड दिल्ली में बनता है और व्ही अन्य राज्यों में बनता है | चलो संविधान का हवाला देकर आप कुछ कह भी दे तो क्या ऐसा नही हो सकता कि मुख्यमंत्री और LG के विषय बाँट दिए जाए क्योंकि एक चुने हुए आदमी की जिम्मेदारी किसी नियुक्त आदमी से कहीं ज्यादा होती है |
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जैसे ही हाई कोर्ट से फैसला आया उसके बाद से दिल्ली में दुविधा बढती चली गयी क्योंकि सरकार को अपंग बना दिया गया , सारे अधिकार छीन लिए गये और एक हेडमास्टर साहब ऊपर बैठा दिए गये जिसका खामियाजा ये हुआ कि दिल्ली सरकार के हर जनहित कार्य और प्लान में देरी होने लगी तथा कुछ फैसलों को खारिज तक कर दिया गया जैसे कि दिल्ली सरकार ने दिल्ली में बसों का किराया कम करने का फैसला किया था जिसको ;LG साहब ने खारिज कर दिया , हालाँकि अभी दिल्ली में मेट्रो का किराया बढ़ा है जिसे खारिज करना चाहिए था , ऐसे अनेकों फैसलों को LG ने खारिज किया |

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मुख्य बात है अधिकारियों कि जोकि दिल्ली में काम कर रहे है उनके ट्रान्सफर इत्यादि , हटाना , लगाना ये सब काम LG के अधीन है यानि अगर किसी अफसर से जनता को शिकायत है तो जनता के चुने हुए मुख्यमंत्री तक को पॉवर नही कि उस अफसर को हटा सकें | तो फिर क्या फायदा है ऐसी सरकार का , ऐसे मतदाताओं का - अगर जनता के चुने हुए प्रतिनिधि को कोई अधिकार आप देंगे ही नही तो फिर क्या फायदा है यहाँ चुनाव करवाने का |


जनता को बेवकूफ बनाया जा रहा है , उर जनता ख़ुशी से बन रही तथा अपने चुने हुए प्रतिनिधि को कोस रही है , बेवकूफ जनता ये नही समझ रही है कि तुम्हारे ही गले को दबाया जा रहा है , तुमने जिसे काम करे भेजा था उसके साथ ये व्यवस्था (सिस्टम) क्या खेल , खेल रहा है | इसका शिकार तुम ही होने वाले हो | भाजपा और कांग्रेस की व्यवस्था ही उस सिस्टम की जनक है | अगर आम आदमी पार्टी खत्म हो जाती है या सरकार गिर भी जाती है तो आप ही का नुक्सान है क्यूंकि आप जरा खुद सोचिए कि पूर्ण पॉवर वाले UP , राजस्थान , हरियाणा वाले मुख्यमंत्री भी कुछ नही कर पा रहे है - वैसा ही एक और नमूना आपको यहाँ पकड़ा दिया जायेगा जो बिजली , पानी , महंगा करेगा | हर साल दाम बढ़ेंगे और सत्ता का दुरूपयोग सबसे ज्यादा |

सोचिए और समझिये , भले ही आप सहमत ना हों पर जरा एक बार नजरिया बदलिए | धन्यवाद

Tuesday, May 16, 2017

बेटी बचाओ, बेटी पढाओ

बेटी बचाओ, बेटी पढाओ
ये नारा हरियाणा की खट्टर सरकार ने दिया था और परिणिति चोपड़ा को ब्रांड एम्बेसडर भी बना दिया था | रोहतक-सोनीपत में हाल ही में दुर्दांत गैंगरेप की घटना घटी है , घटना इतनी अमानवीय है की यहाँ लिखना मुस्किल है जाहिर सी बात है कानून व्यवस्था के नाम पर लचर व्यवस्था है प्रदेश में उपर से घटिया मानसिकता वाले मुख्य(मंत्री) है | घटना काफी हुई है ऐसी हरियाणा में -यानि बेटी बचाने में सक्षम नही है आप |

अब बात करते है बेटी पढ़ाने की - तो दक्षिण हरियाणा के अहिरवाल क्षेत्र के गढ़ रेवाड़ी में स्कूली छात्राएं पिछले 8 दिन से भूख हडताल पर बैठी है | उनकी मांग किसी के विदेशी चंदो या दौरों की जानकारी लेना नही है बल्कि वे सब चाहती है कि उनके गाँव के स्कूल को 12वी कक्षा तक अपग्रेड किया जाये ताकि उन्हें दुसरे गाँव ना जाना पड़े | समस्या उन्हें दुसरे गाँव जाने से नही है , समस्या ये है कि उनकी सुरक्षा भगवान के भरोसे है क्योंकि दुसरे गाँव के राह में विकृत मानसिकता के लडके उनपे फब्तियां कसते है , छेड़छाड़ करते है , ना जाने कब रोहतक जैसी घटना घट जाए यदि ऐसा होता है तो जिम्मेदारी लेगा कौन |
लडकियाँ और उनके माता पिता खुद हडताल पर बैठे है , कुछ छात्राओं की हालत खराब होती जा रही है लेकिन सरकार का कोई मंत्री , संतरी , बाबु यहाँ नही आया है |

सुनने में आया है बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव भी इनके समर्थन में है जोकि हाल ही में घटिया खाने की शिकायत करने के चलते सीमा सुरक्षा बल से बर्खास्त किए गये |

इस राज्य में भाजपा की सरकार है , और केंद्र में भी भाजपा है | पुलिस तो सक्षम है नही, और सरकार को चिंता नही |


Mentality of CM


Thursday, May 11, 2017

केजरीवाल अगर संघर्ष करने को तैयार हों तो मुझे गालियां खाकर भी उनके पक्ष में खड़े रहने से गुरेज नहीं होगा.




उम्मीदों से भरे एक आंदोलनकारी नेता को अंत की तरफ बढ़ते देखना दुखद है! -

मैं केजरीवाल के पक्ष में खड़ा होना चाहता हूं. ये जानते हुए भी इस वक्त ऐसी बात मुंह से निकालना गालियों की बौछार को न्योता देना है. ये जानते हुए भी कि ये एक बहुत कमजोर और लगभग हारा हुआ मुकदमा है.मैं केजरीवाल के पक्ष में इसलिए खड़ा होना चाहता हूं क्योंकि मैं उन्हें उसी भीड़तंत्र की भेंट चढ़ता हुआ देख रहा हूं, जिस भीड़तंत्र ने उन्हें बनाया था. भीड़ बहुत ताकतवर चीज है. भीड़ किसी राह चलते आदमी को महात्मा बना सकती है और किसी बेकसूर की जान भी ले सकती है. भीड़ चुटकियों में सब कुछ तय कर लेती है. भीड़ से एक आवाज उठती है- ईमानदारी का बोलबाला है और पूरा देश मान लेता है कि ईमानदारी का युग आ गया. भीड़ से आवाज उठती है बेईमान का मुंह काला और पूरा देश मान लेता है कि कल तक जो ईमानदार था अब वह परले दर्जे का बेईमान है. भीड़ फौरन कंबल और डंडा ढूंढने लगती है. इसी तरह चलता है हमारा महान लोकतंत्र.
लहरों की सवारी :-
केजरीवाल के उत्थान और पतन की कहानी लहरों की सवारी की कहानी है. कुछ साल पहले भारत में ईमानदारी की एक लहर उठी और देखते-देखते मास हिस्टीरिया यानी सामूहिक उन्माद में बदल गई.पूरे घर को बदल डालूंगा वाले अंदाज में देश ने मान लिया कि हम जिस व्यवस्था में रहते हैं वह बने रहने लायक नहीं है. कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका सबकुछ पूरी तरह भ्रष्ट है. देखा जाये तो यह बात पूरी तरह सही नहीं है लेकिन बहुत हद तक सच है.
लेकिन इस सच तक हमारी महान जनता किस आधार पर पहुंची? क्या वह कोई सामूहिक विवेक था जो देश की हालत को देखते और समझते हुए धीरे-धीरे विकसित हुआ था. अगर ऐसा हुआ होता तो देश सचमुच बदल जाता. लेकिन वह महज एक लहर थी, ठीक वैसी ही लहर जिस तरह नये फैशन की कोई लहर उठती है. या फिर भारत पर वर्ल्ड कप क्रिकेट जीतने का जो बुखार चढ़ता है. जिस तरह पब्लिक कहती है,  'सोनम गुप्ता बेवफा है' उसी तरह पूरे देश ने कहना शुरू कर दिया- पॉलिटकल सिस्टम सड़ा हुआ है और देश की संसद डाकुओं का अड्डा है.
बीजेपी के लिए केजरीवाल का डर उसी वक्त था जब तक भीड़ की ताकत उनके साथ नजर आ रही थी. मास हिस्टीरिया एक बार फिर उभर रहा है लेकिन अलग ढंग से. जिस तरह केजरीवाल ईमानदारी के सबसे बड़े मसीहा माने गये थे उसी तरह उन्हें बिना किसी ठोस तथ्य के भ्रष्ट करार दिया जा रहा है. जिस भीड़ ने उन्हें सिर आंखों पर बिठाया था वही भीड़ अब उन्हें पांवों तले रौंदने को तैयार है. जाहिर है बीजेपी के लिए अपने दुश्मन की राजनीतिक हत्या का इससे बेहतर कोई और मौका नहीं होगा. आम आदमी पार्टी के आधे से ज्यादा विधायकों पर मुकदमे हैं. बहुत से असंतुष्ट हैं. ब्लैकमेलिंग और सौदेबाजी की खबरें भी आम हैं. ऐसे में ताज्जुब नहीं होगा कि अगर आनेवाले महीनो में आम आदमी पार्टी की सरकार गिर जाये.
नैतिकता के साथ चालूपने की मिलावट नहीं चल सकती और कम बेईमान आदमी ज्यादा बेईमान आदमी से ईमानदारी की जंग नहीं जीत सकता.
ये बातें अगर केजरीवाल समझने को तैयार हों और देश को समझाने के लिए संघर्ष करने को तैयार हों तो मुझे गालियां खाकर भी उनके पक्ष में खड़े रहने से गुरेज नहीं होगा.
http://hindi.firstpost.com/politics/the-eclipse-of-arvind-kejriwal-as-a-leader-is-a-sad-chapter-of-indian-politics-sa-28386.html

I Am Raising : संकलन

दिन प्रतिदिन वातावरण में उठने वाले सभी मुद्दों जोकि सामाजिक , राजनीतिक इत्यादी है, का संकलन यहाँ किया गया है |लेखन और सामग्री व्यक्तिगत विचार है |