Tuesday, July 18, 2017

​जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।




​जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।

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तब देश को एक मजबूत ईमानदार और निष्पक्ष सरकार मिलेगी।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब अण्णा हजारे का लोकपाल विधेयक लागू होगा।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब आरटीआई का उपयोग प्रजातंत्र को मजबूत करने में होगा।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब जात-पात की राजनीति का अंत होगा।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब भारत फिर एक बार सोने की चिड़िया कहलायेगा।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब एक अमरीकी डॉलर की कीमत ₹४० से ₹१ हो जायेगी।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब पेट्रोल ₹३५ लिटर मिलेगा।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब किसानों की आत्महत्याएं बंद हो जायेंगी।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब प्याज़ पर टमाटर मुफ्त मिलेगा।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब नहीं होगी मंहगाई की मार।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब नहीं होगी धर्म की राजनीति।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब यह पुरातनकाल से चल रही रेल व्यवस्था बन्द करेंगे और बुलेट ट्रेनों में देश को घुमायेंगे।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब भारत विदेशों में निवेश करेगा और वालमार्ट अमेज़न जैसी कंपनियां भारत से बाहर निकल जायेंगी।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब दाऊद इब्राहिम आर्थर रोड जेल में होगा और ललित मोदी तिहाड़ में, विजय मल्या के लिए तो पृथ्वी छोटी हो जायेगी भागने के लिए।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब स्विस बैंकों में जमा काला पैसा भारत वापस आयेगा।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब आप की आय आप की होगी, कोई आयकर नहीं होगा। उल्टे सरकार आप के खातों में ₹१५ लाख जमा करेगी।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब पनामा द्वीप में आपना काला धन रखने वालों का मुंह काला कर गधे पर बैठाकर शहर घुमाया जायेगा।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब शादी ब्याह जात और कुंडली देखकर नहीं, कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी देखकर किया जायेगा।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब कोई भी भारतीय दाढ़ी, टोपी, पगड़ी, धोती और टीके के लिए नहीं मारा जायेगा।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब १०४४ लोगों के हत्यारे को शिक्षा मिलेगी।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब कश्मीर पुर्ण रूप से हमारा होगा। जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा नहीं होगा बल्कि सारा भारत एक तिरंगे के अधीन होगा।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब जम्मू-कश्मीर से ३७० रफुचक्कर हो जायेगी औ वहां भी अदानी, अंबानी और टाटा बजाज के कारखाने होंगे।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब उन लोगों को शिक्षा मिलेगी जिन्हें १९४७ में तिरंगा  मान्य नहीं था।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब उन लोगों को शिक्षा मिलेगी जिन्होंने सालों साल तिरंगे का अपमान किया।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब हम गौमुत्र और गोबर से बाहर निकल मंगल ग्रह पर पहुंचेंगे।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब पाकिस्तान डर से थर थर कांपेगा और चीन को वह लाल आंखें खोल के दिखायेंगे।
जब मोदीजी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तब आधार निर्आधार होगा और जतनता भयमुक्त।
इतने सब कुछ के साथ साथ मोदीजी और भी बहुत कुछ कर देंगे बस अगर वे प्रधानमंत्री बन जाएं, पता नहीं ३१ प्रतिशत को क्या सुझी के उन्होंने एक ऐसे आदमी को देश का प्रधानमंत्री चुना है जो ३ साल से देश को चूना लगा रहा है, विदेशों के दौरे कर रहा है और कुछ अमीरों की अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग। कौन है यह आदमी!

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Monday, July 17, 2017

विलुप्त विपक्ष , आप और हम


देश में  राजनीतिक व्यवस्था का एक अलग प्रकार का राजनीतिकरण किया जा रहा है जिसका सत्ता पक्ष को पूर्ण रूप से फायदा पहुंच रहा है , वहीँ दूसरी ओर विपक्ष जोकि अब केवल नाम मात्र का ही बचा है , वो हाशिये पर जा रहा है जिसका आगामी नुकसान  देश तथा देश की राजनीतिक व्यवस्था दोनों को ही उठाना पड़ेगा चूँकि विपक्ष की कमी सत्ताधारी दल तथा सरकार को भयमुक्त करते हुए निरंकुशता की तरफ अग्रसर करती है अतः निश्चित ही निरंकुशता का व्यापक स्तर पर बढना तय है |

मुख्य विपक्ष के नाम पर देश में कांग्रेस का स्थान है लेकिन पार्टी खुद की आंतरिक कलह और गुटबाजी का शिकार है भले ही पार्टी की ये बातें सार्वजनिक रूप से सामने नही आती लेकिन सच्चाई यही है | कांग्रेस में शीर्ष नेतृत्व भी एक अजीब सा रवैय्या अपनाए हुए है , अध्यक्षा जी के तो मीडिया से रूबरू होने के चर्चे ही नही आते | उपाध्यक्ष जी विदेशो में छुट्टीयों में ही अधिकांश समय व्यतीत कर देते है | कांग्रेस के बाकी नेता आराम फरमा रहे है , कोई एक आध नेता जी है जो लोकसभा और राज्यसभा में पार्टी की पूर्ण जवाबदेही लेकर बैठे है |

यूपीए के अन्य सहयोगियों का वही हाल है जो शादी में बारातियों का होता है , सरकार किसी की भी हो ये बेचारे मध्यम वर्ग की तरह नेतागिरी में जीवन व्यतीत करते है और अभी भी कर रहे है हालाँकि आर्थिक रूप से ये दल भी खूब आसामी है |

भाजपा इन विरोधियो को चुप करके फूली नही समा रही है और जबकि कथित विपक्ष खुद ही आज के परिद्रश्य में उदासीन हालत में रहने को आतुर है या फिर कहें जानबूझ कर है |

राजनीतिक रूप से विपक्ष का थोडा बहुत काम दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी आम आदमी पार्टी कर रही है | मुख्य रूप से आप और इसके नेताओं अरविन्द केजरीवाल , मनीष सिसोदिया , आशुतोष आदि तो सार्वजनिक तौर पर कड़े शब्दों में भाजपा , केंद्र सरकार तथा मोदी जी के विरोध में देखा जा सकता है |

देश में एक नया विपक्ष जन्म ले रहा है जोकि सरकार (भाजपा) और इनके चेलों (भक्तों) से लड़ता है , बहस करता है , तर्क देता है , सवाल करता है , जवाब देता है |

ये विपक्ष है - वो जनता जिसकी 3 साल में आँखे खुल चुकी है , इस नवचेतना का संचार करने में कई लोगो का योगदान है जिनको  भाजपा ने प्रताड़ित किया , मीडिया ट्रायल करवाया , डराया , धमकाया -

ये लोग है कन्हैया कुमार(JNU छात्र) , जिग्नेश मेवानी(दलित नेता) , हार्दिक पटेल (किसान नेता) , अरविन्द केजरीवाल(मुख्यमंत्री दिल्ली) , मनीष सिसोदिया(उप मुख्यमंत्री दिल्ली) , कुमार विश्वास(कवि) , शेला राशीद(jnu छात्रा), भीम आर्मी , और अनेक छोटे-बडे आन्दोलन  , |

इस विपक्ष का साथ देने वालों की संख्या भले ही कम है लेकिन देश की वास्तविक हालत को समझने वाले यही है तथा ये वे लोग है जिनको सच्चाई दिखने लगी है कि 3 साल में भाजपा ने देश में क्या किया है और क्या दिखाया है |

- अजय कुमार , लेखक के निजी विचार

Saturday, June 3, 2017

दिल्ली की दुविधा

दिल्ली की दुविधा 😡👈👈👈✍️✍️
दिल्ली में चुनाव के समय आम आदमी पार्टी नई थी और पूर्ण रूप से आश्वस्त होकर कह सकता हूँ कि आप के जितना कर्मठ कोई और था भी नही अतः दिल्ली की जनता ने अपना पूर्ण मतदान आम आदमी पार्टी और श्री अरविन्द केजरीवाल को दिया तथा दिल्ली में बहुमत की सरकार बनवाई |
जब जनता ने पूर्ण बहुमत देकर किसी पार्टी को जितवाया है तो उस पार्टी से उम्मीद की जाती है कि वो पार्टी और उसकी सरकार जनता के हित के लिए काम करें |

दिल्ली की जनता के विश्वास पर खरा उतरने का कार्य जैसे ही अरविन्द केजरीवाल और उनकी सरकार ने शुरू किया तो एक हारा हुआ दल जिसकी देश में सरकार है जिसके पास पूरी ताकत है , संगठन है ,, पैसा है सब कुछ है, ने अपनी गंदी राजनीति शुरू कर दी चूँकि पुलिस उनके पास थी तो पहले तो उन्होंने पुलिस के माध्यम से आम आदमी पार्टी के विधायको को गिरफ्तार क्क्रना शुरू किया वो भी मामूली से मामलों पर जिनमे से अधिकांश केवल आरोप तक ही सिमित थे जिनके मामले में आज तलक दिल्ली पुलिस जांच पूरी नही कर पाई है |

पहला एजेंडा था कि भ्रष्टाचार को खत्म कैसे किया जाये , उसके लिए एंटी करप्शन ब्यूरो की आवश्यकता थी जिसके लिए मुख्यमंत्री द्वारा SS यादव आईपीएस को नियुक्त किया गया था, 150 से ज्यादा गिरफ्तारी और एक हेल्पलाइन फोन नंबर जारी किया गया लेकिन एक रोज जब इसी ब्यूरो ने दिल्ली पुलिस के 2 सिपाहियों को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया तो खलबली मच गयी क्यूंकि अगर ऐसे ही गिरफ्तारी का सिलसिला चल पड़ता तो इसकी काफी अनसुनी परतें सामने आ जाती | इसके बाद एक अतिरिक्त पद को स्थापित किया गया तथा MK मीना आईपीएस को वहां नियुक्त कर दिया गया उसके पश्चात सरकार के अधिकार से ACB का कार्य एक तरह से छीन लिया गया |


उसके बाद एक ऐसे आदमी के माध्यम से दिल्ली की सरकार को परेशान किया जाने लगा जिसका मतदान और सरकार से कोई जमीनी रिश्ता नही होता हालाँकि संविधान के अनुसार रिश्ता जरुर है , दिल्ली के राज्यपाल के माध्यम से दिल्ली की चुनी हुई सरकार को परेशान किया जाने लगा , चूँकि जनता ने मतदान किया है तो जनता काम मांगती है , जब भी कोई कारवाई या न्य कार्य दिल्ली की चुनी हुई सरकार शुरू करती उसमे टांग अडाने या विघ्न पैदा करने के आदेश उपराज्यपाल को प्रधानमंत्री कार्यालय से दे दिए जाते | सैंकड़ो फाइल्स को LG ने रोक कर रखा , अधिकांश को वापिस लौटा दिया | लेकिन अभी तक ये टांग अडाने का काम इतना प्रबल नही था |
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इस टांग अडाने के मामले को लेकर सरकार ने हाई कोर्ट का रुख किया , वहां के माननीय जज साहब ने फैसला दिया कि LG ही बड़े है और इन्ही कि चलेगी , तो इस बारे में मेरा और सरकार का दोनों का एक ही मत है- दिल्ली के और देश के लोगों के मतदान में फर्क क्यूँ किया जाता है , वही वोटर कार्ड दिल्ली में बनता है और व्ही अन्य राज्यों में बनता है | चलो संविधान का हवाला देकर आप कुछ कह भी दे तो क्या ऐसा नही हो सकता कि मुख्यमंत्री और LG के विषय बाँट दिए जाए क्योंकि एक चुने हुए आदमी की जिम्मेदारी किसी नियुक्त आदमी से कहीं ज्यादा होती है |
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जैसे ही हाई कोर्ट से फैसला आया उसके बाद से दिल्ली में दुविधा बढती चली गयी क्योंकि सरकार को अपंग बना दिया गया , सारे अधिकार छीन लिए गये और एक हेडमास्टर साहब ऊपर बैठा दिए गये जिसका खामियाजा ये हुआ कि दिल्ली सरकार के हर जनहित कार्य और प्लान में देरी होने लगी तथा कुछ फैसलों को खारिज तक कर दिया गया जैसे कि दिल्ली सरकार ने दिल्ली में बसों का किराया कम करने का फैसला किया था जिसको ;LG साहब ने खारिज कर दिया , हालाँकि अभी दिल्ली में मेट्रो का किराया बढ़ा है जिसे खारिज करना चाहिए था , ऐसे अनेकों फैसलों को LG ने खारिज किया |

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मुख्य बात है अधिकारियों कि जोकि दिल्ली में काम कर रहे है उनके ट्रान्सफर इत्यादि , हटाना , लगाना ये सब काम LG के अधीन है यानि अगर किसी अफसर से जनता को शिकायत है तो जनता के चुने हुए मुख्यमंत्री तक को पॉवर नही कि उस अफसर को हटा सकें | तो फिर क्या फायदा है ऐसी सरकार का , ऐसे मतदाताओं का - अगर जनता के चुने हुए प्रतिनिधि को कोई अधिकार आप देंगे ही नही तो फिर क्या फायदा है यहाँ चुनाव करवाने का |


जनता को बेवकूफ बनाया जा रहा है , उर जनता ख़ुशी से बन रही तथा अपने चुने हुए प्रतिनिधि को कोस रही है , बेवकूफ जनता ये नही समझ रही है कि तुम्हारे ही गले को दबाया जा रहा है , तुमने जिसे काम करे भेजा था उसके साथ ये व्यवस्था (सिस्टम) क्या खेल , खेल रहा है | इसका शिकार तुम ही होने वाले हो | भाजपा और कांग्रेस की व्यवस्था ही उस सिस्टम की जनक है | अगर आम आदमी पार्टी खत्म हो जाती है या सरकार गिर भी जाती है तो आप ही का नुक्सान है क्यूंकि आप जरा खुद सोचिए कि पूर्ण पॉवर वाले UP , राजस्थान , हरियाणा वाले मुख्यमंत्री भी कुछ नही कर पा रहे है - वैसा ही एक और नमूना आपको यहाँ पकड़ा दिया जायेगा जो बिजली , पानी , महंगा करेगा | हर साल दाम बढ़ेंगे और सत्ता का दुरूपयोग सबसे ज्यादा |

सोचिए और समझिये , भले ही आप सहमत ना हों पर जरा एक बार नजरिया बदलिए | धन्यवाद

I Am Raising : संकलन

दिन प्रतिदिन वातावरण में उठने वाले सभी मुद्दों जोकि सामाजिक , राजनीतिक इत्यादी है, का संकलन यहाँ किया गया है |लेखन और सामग्री व्यक्तिगत विचार है |