Saturday, August 12, 2017

गंदगी ने खा लिया 60 से ज्यादा बच्चों को

गंदगी ने खा लिया 60 से ज्यादा बच्चों को 

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जी हाँ ये व्ही गंदगी है , और ये वहां की गंदगी है , जहाँ 19 साल से सांसद रहने वाला व्यक्ति आज उसी उत्तर प्रदेश पूर्ण राज्य का मुख्यमंत्री है |

ये गंदगी कैसी है जो एक आदमी 19 साल से साफ़ नही कर पाया , या फिर कहे की साफ़ करना ही नही चाहा उसने कभी |

ये गंदगी 60 से ज्यादा बच्चों को काल का ग्रास बना गयी , लेकिन इस गंदगी से निपटने की जिम्मेदारी प्रदेश के मुखिया और गोरखपुर के सांसद साहब की थी |

दरअसल ये गंदगी सिर्फ बच्चो में नही है , केवल उनके आसपास नही है , वास्तव में ये गंदगी उस प्रदेश की वर्तमान सरकार में है , वर्तमान प्रशासन में है, प्रदेश-देश की सोच में है   जो चुनाव से पहले लम्बी लम्बी फेंकते थे और आज पूर्व सरकारों को दोषी बता रहे है , जी हाँ बेशक पूर्व सरकार दोषी है लेकिन वर्तमान में 2-4 रोज पूर्व आप BRD अस्पताल का कौनसा गहन निरिक्षण करके आये थे की आपको 66 लाख रकम का मामला नजर नही आया |

ये गंदगी उन मतदाताओ के मतो में है जो शायद इस दल विशेष को गये ही नही थे EVM का नतीजा थे |

ये गंदगी इस देश के प्रधान सेवक के मन के अंदर है कि वो फलां देश के फलां मंत्री के जन्मदिन तक के लिए ट्वीट करता है लेकिन 60 बच्चो के लिए उसका हाथ नही चलता है |

ये गंदगी अंजना ॐ कश्यप में है जो हल्ला बोल में सीधे सवाल नही फेंकती

ये गंदगी अमिश देवगन में है जो घटना आरपार नही करता

ये गंदगी अरनब के मन की भी है जिसे कांग्रेस से फुर्सत नही

ये गंदगी स्वेता सिंह के नजरिये में भी है जिसे 60 बच्चो का कलयुगी वध नही दिखता

ये सुधीर चौधरी के मन में गंदगी है जो DNA में जिम्मेदारी नही बताता

और ये गंदगी हम हजारो-लाखो-करोड़ो में है जो हम ये सब देख कर 2 दिन विलाप करके सो जाते है और दोबारा ऐसे हत्यारों को चुन लेते है |



Thursday, August 10, 2017

ख़ुदा गवाह

ख़ुदा गवाह

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शिकवा भी है, ये फ़रियाद भी आई न तुझे कभी इसकी याद भी वो बदनसीब आज भी देखो तेरा रास्ता ख़ुदा गवाह ख़ुदा गवाह मिट्टी तो नहीं दामन से झाड़ दी चिट्टी तो नहीं जो पढ़ के फाड़ दी तोड़ने से भी टूटता नहीं रिश्ता ख़ून का गवाह ख़ुदा
- ख़ुदा गवाह

ज़माना जानता है बंदा लिखा करता था

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आसमान डराता है बिजलियाँ चमकाकर हम भी डरा देते हैं अपने दाँत चमकाकर !
नहीं हुआ जी शायर कमाल का तो क्या ज़माना जानता है बंदा लिखा करता था !

तुम्हारी पुलिस है, तुम्हारे सारे जज भी हैं ,
इशारे पर तेरे दोनों प्याज़ लेकर हाज़िर हैं मुल्क में बिक गया है विधि का विधान भी ,
देखो बचा भी है क्या हमारा संविधान जी जज साहब ज़रा दिल पर हाथ रख लो,
गीता छोड़ो संविधान की क़सम कह दो।
अदालतों से पूछने का वक्त आ रहा है ,
तराज़ू पर कुछ सवाल रखने हैं अभी क्या यह सही है कि जज भी डर गए हैं ,
ऐसा है तो चलो जेल में मुल्क बसाते हैं
हम कफ़स की दीवारों पर लिक्खेंगे
हम कफ़न की चादरों पर लिक्खेंगे पूछेंगे वतन की इन हवाओं से रोज़,
तुमने भी देखा क्या बादशाह डरपोक

-Ravish Kumar NDTV

I Am Raising : संकलन

दिन प्रतिदिन वातावरण में उठने वाले सभी मुद्दों जोकि सामाजिक , राजनीतिक इत्यादी है, का संकलन यहाँ किया गया है |लेखन और सामग्री व्यक्तिगत विचार है |